सर पे हिमालय का छत्र है,
(मूल हिन्दी गीत श्री भरत व्यास लिखित)
जय भारती, वन्दे भारती ।। (०)
सर पे हिमालय का छत्र है,
चरणों में नदियां एकत्र हैं ।
हाथों में वेदों के पत्र हैं,
देश नहीं ऐसा अन्यत्र है ।
जय भारती, वन्दे भारती।
जय भारती, वन्दे भारती ।। (१)
धूएं से पावन ये व्योम है,
घर-घर में होता जहां होम है ।
पुलकित हमारे रोम-रोम है,
आदि अनादि शब्द ओम् है ।
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।। (२)
जिस भूमि पे जन्म लिया राम ने,
गीता सुनाई जहां श्याम ने ।
पावन बनाया चारों धाम ने,
स्वर्ग भी लजाए जिसके सामने ।
जय भारती, वन्दे भारती ।
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।। (३)
...........श्री भरत व्यास लिखित

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