Monday, February 25, 2019

Vishnusahasranam Stotram AVAKAHADA Chakra ( अवकहड चक्र एवं विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् )

                                                                                                                                                                          ವನೌಷಧೀ ಗುಣಧರ್ಮ ಶಾಸ್ತ್ರ  (संग्रहित)
AVAKAHADA  CHAKRA Vishnusahasranam Stotram
 ( अवकहड चक्र एवं विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् )
(ಅವಕಹಡ ಚಕ್ರ ಏವಂ ವಿಷ್ಣು ಸಹಸ್ರನಾಮ ಸ್ತೋತ್ರಂ)

 ॥ हरिः ॐ ॥

मेष अश्विनि नक्षत्र,  प्रथम चरण    चू                                     
 विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः।
भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः        ॥१॥    
       
मेष अश्विनि नक्षत्र, द्वितीय  चरण   चे 
भूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः।
अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च       ॥२॥

मेष राशी, अश्विनि नक्षत्र,  तृतीय  चरण   चो 
योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः।
नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः      ॥३॥

मेष राशी, अश्विनि नक्षत्र,  चतुर्थ  चरण    ला 
सर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः।
संभवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः         ॥४॥

मेष राशी, भरणी नक्षत्र,  प्रथम  चरण      ली 
स्वयंभूः शम्भुरादित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः।
अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः    ॥५॥

मेष राशी, भरणी नक्षत्र, द्वितीय  चरण     लू 
अप्रमेयो हृषीकेशः पद्मनाभोऽमरप्रभुः।
विश्वकर्मा मनुस्त्वष्टा स्थविष्ठःस्थविरो ध्रुवः॥६॥


मेष राशी, भरणी नक्षत्र, तृतीय चरण      ले 
अग्राह्यः शाश्वतः कृष्णो लोहिताक्षः प्रतर्दनः।
प्रभूतस्त्रिककुब्धाम पवित्रं मङ्गलं परम्         ॥७॥

मेष राशी, भरणी नक्षत्र, चतुर्थ चरण     लो 
ईशानः प्राणदः प्राणो ज्येष्ठः श्रेष्ठः प्रजापतिः।
हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदनः            ॥८॥

मेष राशी, कृतिका नक्षत्र,  प्रथम चरण   आ 
ईश्वरो विक्रमी धन्वी मेधावी विक्रमः क्रमः।
अनुत्तमो दुराधर्षः कृतज्ञः कृतिरात्मवान्       ॥९॥

वृषभ राशी कृतिका नक्षत्र,  द्वितीय चरण     ई 
सुरेशः शरणं शर्म विश्वरेताः प्रजाभवः।
अहः संवत्सरो व्यालः प्रत्ययः सर्वदर्शनः        ॥१०॥


वृषभ राशी कृतिका नक्षत्र, तृतीय चरण    ऊ 
अजः सर्वेश्वरः सिद्धः सिद्धिः सर्वादिरच्युतः।
वृषाकपिरमेयात्मा सर्वयोगविनिःसृतः           ॥११॥

वृषभ राशी  कृतिका नक्षत्र, चतुर्थ चरण     ए 
वसुर्वसुमनाः सत्यः समात्माऽसम्मितः समः।
अमोघः पुण्डरीकाक्षो वृषकर्मा वृषाकृतिः        ॥१२॥

वृषभ राशी रोहिणी नक्षत्र,  प्रथम चरण     ओ 
रुद्रो बहुशिरा बभ्रुर्विश्वयोनिः शुचिश्रवाः।
अमृतः शाश्वत स्थाणुर्वरारोहो महातपाः       ॥१३॥

वृषभ रोहिणी नक्षत्र, द्वितीय  चरण     वा 
सर्वगः सर्वविद्भानुर्विष्वक्सेनो जनार्दनः।
वेदो वेदविदव्यङ्गो वेदाङ्गो वेदवित् कविः   ॥१४॥


वृषभ राशी  रोहिणी नक्षत्र, तृतीय चरण    वी 
लोकाध्यक्षः सुराध्यक्षो धर्माध्यक्षः कृताकृतः।
चतुरात्मा चतुर्व्यूहश्चतुर्दंष्ट्रश्चतुर्भुजः         ॥१५॥

वृषभ राशी रोहिणी नक्षत्र, चतुर्थ चरण     वू 
भ्राजिष्णुर्भोजनं भोक्ता सहिष्णुर्जगदादिजः।
अनघो विजयो जेता विश्वयोनिः पुनर्वसुः      ॥१६॥

वृषभ राशी  मृगशिर नक्षत्र,  प्रथम चरण     वे 
उपेन्द्रो वामनः प्रांशुरमोघः शुचिरूर्जितः।
अतीन्द्रः संग्रहः सर्गो धृतात्मा नियमो यमः  ॥१७॥

वृषभ मृगशिर नक्षत्र, द्वितीय चरण     वो 
वेद्यो वैद्यः सदायोगी वीरहा माधवो मधुः।
अतीन्द्रियो महामायो महोत्साहो महाबलः    ॥१८॥


मिथुन राशी  मृगशिर नक्षत्र, तृतीय चरण    का 
महाबुद्धिर्महावीर्यो महाशक्तिर्महाद्युतिः।
अनिर्देश्यवपुः श्रीमानमेयात्मा महाद्रिधृक्    ॥१९॥

मिथुन राशी  मृगशिर नक्षत्र, चतुर्थ       की 
महेष्वासो महीभर्ता श्रीनिवासः सतां गतिः।
अनिरुद्धः सुरानन्दो गोविन्दो गोविदां पतिः  ॥२०॥

मिथुन राशी  आरिद्रा  नक्षत्र  प्रथम चरण    कू 
मरीचिर्दमनो हंसः सुपर्णो भुजगोत्तमः।
हिरण्यनाभः सुतपाः पद्मनाभः प्रजापतिः       ॥२१॥

मिथुन आरिद्रा नक्षत्र  द्वितीय चरण      घ 
अमृत्युः सर्वदृक् सिंहः सन्धाता सन्धिमान् स्थिरः। 
अजो दुर्मर्षणः शास्ता विश्रुतात्मा सुरारिहा     ॥२२॥



मिथुन  आरिद्रा  नक्षत्र  तृतीय  चरण       
गुरुर्गुरुतमो धाम सत्यः सत्यपराक्रमः।
निमिषोऽनिमिषः स्रग्वी वाचस्पतिरुदारधीः   ॥२३॥

मिथुन राशी  आरिद्रा  नक्षत्र  चतुर्थ चरण    छ 
अग्रणीर्ग्रामणीः श्रीमान् न्यायो नेता समीरणः।
सहस्रमूर्धा विश्वात्मा सहस्राक्षः सहस्रपात्      ॥२४॥

मिथुन राशी  पुनर्वसु  नक्षत्र  प्रथम चरण      के 
आवर्तनो निवृत्तात्मा संवृतः संप्रमर्दनः।
अहः संवर्तको वह्निरनिलो धरणीधरः           ॥२५॥

मिथुन  पुनर्वसु  नक्षत्र  द्वितीय चरण      को 
सुप्रसादः प्रसन्नात्मा विश्वधृग्विश्वभुग्विभुः।
सत्कर्ता सत्कृतः साधुर्जह्नुर्नारायणो नरः      ॥२६॥


मिथुन राशी  पुनर्वसु  नक्षत्र  तृतीय चरण      हा 
असंख्येयोऽप्रमेयात्मा विशिष्टः शिष्टकृच्छुचिः।
सिद्धार्थः सिद्धसंकल्पः सिद्धिदः सिद्धिसाधनः  ॥२७॥

कर्क राशी  पुनर्वसु  नक्षत्र  चतुर्थ चरण      ही 
वृषाही वृषभो विष्णुर्वृषपर्वा वृषोदरः।
वर्धनो वर्धमानश्च विविक्तः श्रुतिसागरः        ॥२८॥

कर्क राशी  पुष्य नक्षत्र  प्रथम चरण      हू 
सुभुजो दुर्धरो वाग्मी महेन्द्रो वसुदो वसुः।
नैकरूपो बृहद्रूपः शिपिविष्टः प्रकाशनः           ॥२९॥

कर्क  पुष्य  नक्षत्र  द्वितीय चरण     हे  
ओजस्तेजोद्युतिधरः प्रकाशात्मा प्रतापनः।
ऋद्धः स्पष्टाक्षरो मन्त्रश्चन्द्रांशुर्भास्करद्युतिः  ॥३०॥


कर्क राशी  पुष्य नक्षत्र  तृतीय चरण     हो 
अमृतांशूद्भवो भानुः शशबिन्दुः सुरेश्वरः।
औषधं जगतः सेतुः सत्यधर्मपराक्रमः              ॥३१॥

कर्क राशी  पुष्य नक्षत्र  चतुर्थ चरण      डा 
भूतभव्यभवन्नाथः पवनः पावनोऽनलः।
कामहा कामकृत्कान्तः कामः कामप्रदः प्रभुः     ॥३२॥

कर्क राशी  आश्लेषा नक्षत्र प्रथम चरण     डी 
युगादिकृद्युगावर्तो नैकमायो महाशनः। 
अदृश्यो व्यक्तरूपश्च सहस्रजिदनन्तजित्        ॥३३॥

कर्क राशी  आश्लेषा नक्षत्र द्वितीय चरण     डू 


इष्टोऽविशिष्टः शिष्टेष्टः शिखण्डी नहुषो वृषः।
क्रोधहा क्रोधकृत्कर्ता विश्वबाहुर्महीधरः             ॥३४॥

कर्क राशी  आश्लेषा नक्षत्र तृतीय चरण     डे 
अच्युतः प्रथितः प्राणः प्राणदो वासवानुजः।
अपांनिधिरधिष्ठानमप्रमत्तः प्रतिष्ठितः          ॥३५॥

कर्क राशी  आश्लेषा नक्षत्र चतुर्थ चरण     डो 
स्कन्दः स्कन्दधरो धुर्यो वरदो वायुवाहनः।
वासुदेवो बृहद्भानुरादिदेवः पुरन्दरः                    ॥३६॥

सिंह राशी  मघा क्षत्र प्रथम चरण      मा 
अशोकस्तारणस्तारः शूरः शौरिर्जनेश्वरः।
अनुकूलः शतावर्तः पद्मी पद्मनिभेक्षणः              ॥३७॥

सिंह राशी  मघा क्षत्र द्वितीय चरण     मी 
पद्मनाभोऽरविन्दाक्षः पद्मगर्भः शरीरभृत्।
महर्द्धिरृद्धो वृद्धात्मा महाक्षो गरुडध्वजः             ॥३८॥


सिंह राशी  मघा क्षत्र तृतीय चरण     मू 
अतुलः शरभो भीमः समयज्ञो हविर्हरिः।
सर्वलक्षणलक्षण्यो लक्ष्मीवान् समितिञ्जयः    ॥३९॥

सिंह राशी  मघा क्षत्र चतुर्थ चरण     मे 
विक्षरो रोहितो मार्गो हेतुर्दामोदरः सहः।
महीधरो महाभागो वेगवानमिताशनः             ॥४०॥

सिंह राशी  पूर्वा  नक्षत्र  प्रथम चरण     मो 
उद्भवः क्षोभणो देवः श्रीगर्भः परमेश्वरः।
करणं कारणं कर्ता विकर्ता गहनो गुहः            ॥४१॥

सिंह राशी  पूर्वा  नक्षत्र  द्वितीय चरण     टा 
व्यवसायो व्यवस्थानः संस्थानः स्थानदो ध्रुवः।
परर्द्धिः परमस्पष्टस्तुष्टः पुष्टः शुभेक्षणः       ॥४२॥


सिंह राशी  पूर्वा  नक्षत्र  तृतीय चरण    टी
रामो विरामो विरजो मार्गो नेयो नयोऽनयः।
वीरः शक्तिमतां श्रेष्ठो धर्मो धर्मविदुत्तमः     ॥४३॥

सिंह राशी  पूर्वा  नक्षत्र  चतुर्थ चरण     टू
वैकुण्ठः पुरुषः प्राणः प्राणदः प्रणवः पृथुः।
हिरण्यगर्भः शत्रुघ्नो व्याप्तो वायुरधोक्षजः     ॥४४॥

सिंह राशी उत्तरा नक्षत्र  प्रथम चरण     टे 
ऋतुः सुदर्शनः कालः परमेष्ठी परिग्रहः।
उग्रः संवत्सरो दक्षो विश्रामो विश्वदक्षिणः      ॥४५॥

कन्या राशी   उत्तरा नक्षत्र  द्वितीय चरण     टो 
विस्तारः स्थावरस्थाणुः प्रमाणं बीजमव्ययम्।
अर्थोऽनर्थो महाकोशो महाभोगो महाधनः       ॥४६॥


कन्या राशी   उत्तरा नक्षत्र  तृतीय चरण    पा 
अनिर्विण्णः स्थविष्ठोऽभूर्धर्मयूपो महामखः।
नक्षत्रनेमिर्नक्षत्री क्षमः क्षामः समीहनः           ॥४७॥

कन्या राशी  उत्तरा नक्षत्र चतुर्थ चरण     पी 
यज्ञ इज्यो महेज्यश्च क्रतुः सत्रं सतां गतिः।
सर्वदर्शी विमुक्तात्मा सर्वज्ञो ज्ञानमुत्तमम्    ॥४८॥

कन्या राशी  हस्ता नक्षत्र  प्रथम चरण     पू 
सुव्रतः सुमुखः सूक्ष्मः सुघोषः सुखदः सुहृत्।
मनोहरो जितक्रोधो वीरबाहुर्विदारणः              ॥४९॥

कन्या  हस्ता नक्षत्र  द्वितीय चरण     षा 
स्वापनः स्ववशो व्यापी नैकात्मा नैककर्मकृत्।
वत्सरो वत्सलो वत्सी रत्नगर्भो धनेश्वरः         ॥५०॥



कन्या राशी  हस्ता नक्षत्र  तृतीय चरण    णा 
धर्मगुब्धर्मकृद्धर्मी सदसत्क्षरमक्षरम्।
अविज्ञाता सहस्रांशुर्विधाता कृतलक्षणः          ॥५१॥

कन्या राशी  हस्ता नक्षत्र  चतुर्थ चरण    ठा 
गभस्तिनेमिः सत्त्वस्थः सिंहो भूतमहेश्वरः।
आदिदेवो महादेवो देवेशो देवभृद्गुरुः              ॥५२॥

कन्या राशी चित्रा नक्षत्र प्रथम चरण     पे 
उत्तरो गोपतिर्गोप्ता ज्ञानगम्यः पुरातनः।
शरीरभूतभृद्भोक्ता कपीन्द्रो भूरिदक्षिणः          ॥५३॥

कन्या   चित्रा नक्षत्र  द्वितीय चरण    पो 
सोमपोऽमृतपः सोमः पुरुजित्पुरुसत्तमः।
विनयो जयः सत्यसंधो दाशार्हः सात्त्वतांपतिः  ॥५४॥


तुला राशी  चित्रा नक्षत्र  तृतीय चरण    रा 
जीवो विनयिता साक्षी मुकुन्दोऽमितविक्रमः।
अम्भोनिधिरनन्तात्मा महोदधिशयोऽन्तकः     ॥५५॥

तुला राशी  चित्रा नक्षत्र  चतुर्थ चरण     री 
अजो महार्हः स्वाभाव्यो जितामित्रः प्रमोदनः।
आनन्दो नन्दनो नन्दः सत्यधर्मा त्रिविक्रमः       ॥५६॥

तुला  राशी  स्वाति नक्षत्र प्रथम चरण     रु  
महर्षिः कपिलाचार्यः कृतज्ञो मेदिनीपतिः।
त्रिपदस्त्रिदशाध्यक्षो महाशृङ्गः कृतान्तकृत्      ॥५७॥

तुला  स्वाति नक्षत्र  द्वितीय चरण     रे 
महावराहो गोविन्दः सुषेणः कनकाङ्गदी।
गुह्यो गभीरो गहनो गुप्तश्चक्रगदाधरः             ॥५८॥



तुला राशी   स्वाति नक्षत्र  तृतीय चरण      रो 
वेधाः स्वाङ्गोऽजितः कृष्णो दृढः संकर्षणोऽच्युतः।
वरुणो वारुणो वृक्षः पुष्कराक्षो महामनाः            ॥५९॥

तुला राशी  स्वाति नक्षत्र  चतुर्थ चरण     ता 
भगवान् भगहाऽऽनन्दी वनमाली हलायुधः।
आदित्यो ज्योतिरादित्यः सहिष्णुर्गतिसत्तमः   ॥६०॥

तुला राशी विशाखा नक्षत्र प्रथम चरण     ती 
सुधन्वा खण्डपरशुर्दारुणो द्रविणप्रदः।
दिवःस्पृक् सर्वदृग्व्यासो वाचस्पतिरयोनिजः    ॥६१॥

तुला विशाखा नक्षत्र  द्वितीय चरण    तू  
त्रिसामा सामगः साम निर्वाणं भेषजं भिषक्।
संन्यासकृच्छमः शान्तो निष्ठा शान्तिः परायणम्॥६२॥



तुला राशी  विशाखा नक्षत्र  तृतीय चरण     ते 
शुभाङ्गः शान्तिदः स्रष्टा कुमुदः कुवलेशयः।
गोहितो गोपतिर्गोप्ता वृषभाक्षो वृषप्रियः         ॥६३॥

वृश्चिक  राशी  विशाखा नक्षत्र  चतुर्थ चरण    तो  
अनिवर्ती निवृत्तात्मा संक्षेप्ता क्षेमकृच्छिवः।
श्रीवत्सवक्षाः श्रीवासः श्रीपतिः श्रीमतांवरः     ॥६४॥

वृश्चिक राशी अनुराधा नक्षत्र  प्रथम चरण    ना 
श्रीदः श्रीशः श्रीनिवासः श्रीनिधिः श्रीविभावनः।
श्रीधरः श्रीकरः श्रेयः श्रीमाँल्लोकत्रयाश्रयः     ॥६५॥

वृश्चि अनुराधा  द्वितीय चरण     नी 
स्वक्षः स्वङ्गः शतानन्दो नन्दिर्ज्योतिर्गणेश्वरः।
विजितात्माऽविधेयात्मा सत्कीर्तिश्छिन्नसंशयः॥६६॥



वृश्चिक राशी  अनुराधा नक्षत्र  तृतीय चरण       नू
उदीर्णः सर्वतश्चक्षुरनीशः शाश्वतस्थिरः।
भूशयो भूषणो भूतिर्विशोकः शोकनाशनः         ॥६७॥

वृश्चिक राशी  अनुराधा नक्षत्र  चतुर्थ चरण    ने 
अर्चिष्मानर्चितः कुम्भो विशुद्धात्मा विशोधनः।
अनिरुद्धोऽप्रतिरथः प्रद्युम्नोऽमितविक्रमः      ॥६८॥

वृश्चिक  राशी ज्येष्ठा नक्षत्र  प्रथम चरण     नो
कालनेमिनिहा वीरः शौरिः शूरजनेश्वरः।
त्रिलोकात्मा त्रिलोकेशः केशवः केशिहा हरिः    ॥६९॥

वृश्चिक ज्येष्ठा नक्षत्र  द्वितीय चरण     या 
कामदेवः कामपालः कामी कान्तः कृतागमः।
अनिर्देश्यवपुर्विष्णुर्वीरोऽनन्तो धनंजयः        ॥७०॥


वृश्चिक  राशी ज्येष्ठा नक्षत्र  तृतीय चरण     यी
ब्रह्मण्यो ब्रह्मकृद् ब्रह्मा ब्रह्म ब्रह्मविवर्धनः।
ब्रह्मविद् ब्राह्मणो ब्रह्मी ब्रह्मज्ञो ब्राह्मणप्रियः॥७१॥

वृश्चिक राशी  ज्येष्ठा नक्षत्र  चतुर्थ चरण     यू 
महाक्रमो महाकर्मा महातेजा महोरगः।
महाक्रतुर्महायज्वा महायज्ञो महाहविः             ॥७२॥

धनु राशी  मूला नक्षत्र  प्रथम चरण     ये  
स्तव्यः स्तवप्रियः स्तोत्रं स्तुतिः स्तोता रणप्रियः।
पूर्णः पूरयिता पुण्यः पुण्यकीर्तिरनामयः          ॥७३॥

धनु मूला नक्षत्र  द्वितीय चरण     यो   
मनोजवस्तीर्थकरो वसुरेता वसुप्रदः।
वसुप्रदो वासुदेवो वसुर्वसुमना हविः                ॥७४॥



धनु राशी  मूला नक्षत्र  तृतीय चरण     भा   
सद्गतिः सत्कृतिः सत्ता सद्भूतिः सत्परायणः।
शूरसेनो यदुश्रेष्ठः सन्निवासः सुयामुनः       ॥७५॥

धनु राशी  मूला नक्षत्र  चतुर्थ चरण     भी   
 भूतावासो वासुदेवः सर्वासुनिलयोऽनलः।
दर्पहा दर्पदो दृप्तो दुर्धरोऽथापराजितः          ॥७६॥

धनु राशी  पूर्वाषाढा नक्षत्र  प्रथम चरण     भू   
विश्वमूर्तिर्महामूर्तिर्दीप्तमूर्तिरमूर्तिमान्।
अनेकमूर्तिरव्यक्तः शतमूर्तिः शताननः      ॥७७॥

धनु  पूर्वाषाढा नक्षत्र  द्वितीय चरण     धा 
एको नैकः सवः कः किं यत् तत्पदमनुत्तमम्।
लोकबन्धुर्लोकनाथो माधवो भक्तवत्सलः   ॥७८॥


धनु राशी  पूर्वाषाढा नक्षत्र  तृतीय चरण     फा 
सुवर्णवर्णो हेमाङ्गो वराङ्गश्चन्दनाङ्गदी।
वीरहा विषमः शून्यो घृताशीरचलश्चलः      ॥७९॥

धनु राशी  पूर्वाषाढा नक्षत्र  चतुर्थ चरण     ढा 
अमानी मानदो मान्यो लोकस्वामी त्रिलोकधृक्।
सुमेधा मेधजो धन्यः सत्यमेधा धराधरः    ॥८०॥

धनु राशी उत्तरा षाढा नक्षत्र  प्रथम चरण    भे  
तेजोवृषो द्युतिधरः सर्वशस्त्रभृतां वरः।
प्रग्रहो निग्रहो व्यग्रो नैकशृङ्गो गदाग्रजः    ॥८१॥

मकर राशी  उत्तरा षाढा नक्षत्र  द्वितीय चरण    भो 
चतुर्मूर्तिश्चतुर्बाहुश्चतुर्व्यूहश्चतुर्गतिः।
चतुरात्मा चतुर्भावश्चतुर्वेदविदेकपात्        ॥८२॥


मकर राशी  उत्तरा षाढा नक्षत्र  तृतीय चरण    जा 
समावर्तोऽनिवृत्तात्मा दुर्जयो दुरतिक्रमः।
दुर्लभो दुर्गमो दुर्गो दुरावासो दुरारिहा         ॥८३॥

मकर राशी  उत्तरा षाढा नक्षत्र  चतुर्थ चरण    जी 
शुभाङ्गो लोकसारङ्गः सुतन्तुस्तन्तुवर्धनः।
इन्द्रकर्मा महाकर्मा कृतकर्मा कृतागमः     ॥८४॥

मकर राशी  श्रवण नक्षत्र  प्रथम चरण     खी 
उद्भवः सुन्दरः सुन्दो रत्ननाभः सुलोचनः।
अर्को वाजसनः शृङ्गी जयन्तः सर्वविज्जयी  ॥८५॥

मकर राशी श्रवण नक्षत्र  द्वितीय चरण    खू   
सुवर्णबिन्दुरक्षोभ्यः सर्ववागीश्वरेश्वरः।
महाह्रदो महागर्तो महाभूतो महानिधिः        ॥८६॥


मकर राशी श्रवण नक्षत्र  तृतीय चरण     खे 
कुमुदः कुन्दरः कुन्दः पर्जन्यः पावनोऽनिलः।
अमृतांशोऽमृतवपुः सर्वज्ञः सर्वतोमुखः       ॥८७॥

मकर राशी श्रवण नक्षत्र  चतुर्थ चरण    खो  
सुलभः सुव्रतः सिद्धः शत्रुजिच्छत्रुतापनः।
न्यग्रोधोऽदुम्बरोऽश्वत्थश्चाणूरान्ध्रनिषूदनः॥८८॥

मकर राशी धनिष्ठा नक्षत्र  प्रथम चरण     गा 
सहस्रार्चिः सप्तजिह्वः सप्तैधाः सप्तवाहनः।
अमूर्तिरनघोऽचिन्त्यो भयकृद्भयनाशनः     ॥८९॥

मकर धनिष्ठा नक्षत्र  द्वितीय चरण    गी 
अणुर्बृहत्कृशः स्थूलो गुणभृन्निर्गुणो महान्।
अधृतः स्वधृतः स्वास्यः प्राग्वंशो वंशवर्धनः ॥९०॥


कुंभ राशी धनिष्ठा नक्षत्र तृतीय चरण    गू 
भारभृत् कथितो योगी योगीशः सर्वकामदः।
आश्रमः श्रमणः क्षामः सुपर्णो वायुवाहनः    ॥९१॥

कुंभ राशी धनिष्ठा नक्षत्र चतुर्थ चरण    गे 
धनुर्धरो धनुर्वेदो दण्डो दमयिता दमः।
अपराजितः सर्वसहो नियन्ताऽनियमोऽयमः॥९२॥

कुंभ राशी शततारा नक्षत्र प्रथम चरण    गो
सत्त्ववान् सात्त्विकः सत्यः सत्यधर्मपरायणः।
अभिप्रायः प्रियार्होऽर्हः प्रियकृत् प्रीतिवर्धनः   ॥९३॥

कुंभ शततारा नक्षत्र द्वितीय चरण    सा
विहायसगतिर्ज्योतिः सुरुचिर्हुतभुग्विभुः।
रविर्विरोचनः सूर्यः सविता रविलोचनः        ॥९४॥


कुंभ राशी शततारा नक्षत्र तृतीय चरण    सी 
अनन्तो हुतभुग्भोक्ता सुखदो नैकजोऽग्रजः।
अनिर्विण्णः सदामर्षी लोकाधिष्ठानमद्भुतः  ॥९५॥

कुंभ राशी शततारा नक्षत्र चतुर्थ चरण    सू 
सनात्सनातनतमः कपिलः कपिरव्ययः।
स्वस्तिदः स्वस्तिकृत्स्वस्ति स्वस्तिभुक्स्वस्तिदक्षिणः॥९६॥

कुंभ राशी पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र  प्रथम चरण    से 
अरौद्रः कुण्डली चक्री विक्रम्यूर्जितशासनः।
शब्दातिगः शब्दसहः शिशिरः शर्वरीकरः           ॥९७॥

कुंभ राशी पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र द्वितीय चरण    सो 
अक्रूरः पेशलो दक्षो दक्षिणः क्षमिणांवरः।
विद्वत्तमो वीतभयः पुण्यश्रवणकीर्तनः           ॥९८॥


कुंभ राशी पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र तृतीय चरण    दा 
उत्तारणो दुष्कृतिहा पुण्यो दुःस्वप्ननाशनः।
वीरहा रक्षणः सन्तो जीवनः पर्यवस्थितः         ॥९९॥

मीन राशी पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र चतुर्थ चरण    दी 
अनन्तरूपोऽनन्तश्रीर्जितमन्युर्भयापहः।
चतुरश्रो गभीरात्मा विदिशो व्यादिशो दिशः      ॥१००॥

मीन राशी उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र प्रथम चरण     दू 
अनादिर्भूर्भुवो लक्ष्मीः सुवीरो रुचिराङ्गदः।
जननो जनजन्मादिर्भीमो भीमपराक्रमः          ॥१०१॥

मीन राशी उत्तराभाद्रपद नक्षत्र  द्वितीय चरण     
आधारनिलयोऽधाता पुष्पहासः प्रजागरः।
ऊर्ध्वगः सत्पथाचारः प्राणदः प्रणवः पणः       ॥१०२॥


मीन राशी उत्तराभाद्रपद नक्षत्र तृतीय चरण       
प्रमाणं प्राणनिलयः प्राणभृत्प्राणजीवनः।
तत्त्वं तत्त्वविदेकात्मा जन्ममृत्युजरातिगः   ॥१०३॥

मीन राशी उत्तराभाद्रपद नक्षत्र चतुर्थ चरण    था 
भूर्भुवःस्वस्तरुस्तारः सविता प्रपितामहः।
यज्ञो यज्ञपतिर्यज्वा यज्ञाङ्गो यज्ञवाहनः       ॥१०४॥  


मीन राशी  रेवति नक्षत्र प्रथम चरण    दे 
यज्ञभृद् यज्ञकृद् यज्ञी यज्ञभुक् यज्ञसाधनः।
यज्ञान्तकृद् यज्ञगुह्यमन्नमन्नाद एव च     ॥१०५॥

मीन  रेवति नक्षत्र द्वितीय चरण    दो  
आत्मयोनिः स्वयंजातो वैखानः सामगायनः।
देवकीनन्दनः स्रष्टा क्षितीशः पापनाशनः     ॥१०६॥
    

मीन राशी  रेवति नक्षत्र तृतीय चरण    चा  
शङ्खभृन्नन्दकी चक्री शार्ङ्गधन्वा गदाधरः।
रथाङ्गपाणिरक्षोभ्यः सर्वप्रहरणायुधः          ॥१०७॥   
श्री सर्वप्रहरणायुध ॐ नम इति।

मीन राशी  रेवति नक्षत्र चतुर्थ चरण    ची  
वनमाली गदी शार्ङ्गी शङ्खी चक्री च नन्दकी।
श्रीमान् नारायणो विष्णुर्वासुदेवोऽभिरक्षतु     ॥१०८॥    
श्री वासुदेवोऽभिरक्षतु ॐ नम इति।

|| श्री कृष्णार्पणमस्तु ||


इष्टार्थ सिद्धिप्रद मंत्रः
उद्योग प्राप्ति:
व्यवसायो व्यवस्थानः।संस्थानः स्थानदो ध्रुवः
परद्धि परमस्पष्ट स्तुष्टः।पुष्टः शुभेक्षणः॥  (४२ श्लोक)

दारिद्र्यनाशन, धनप्राप्ति:।
विस्तारः स्थावरः स्थाणुः।प्रमाणं बीजमव्ययम्।
अर्थोअनर्थो महाकोशो।महाभोगो महाधनः॥ (४६ श्लोक)

ऐश्वर्य प्राप्ति:
श्रीदः श्रीशः श्रीनिवासः।श्रीनिधिः श्रीविभावनः।
श्रीधरः श्रीकरः श्रेयः। श्रीमान् लोकत्रयाश्रयः॥ (६५ श्लोक)

विद्या प्राप्ति:
अमानी मानदो मान्यो।लोकस्वामी त्रिलोकधृत्।
सुमेधा मेधजो धन्यः।सत्यमेधा धराधरः॥ (८० श्लोक)

संतान प्राप्ति:
अणुर्बृहत् कृशः स्थूलो।गुणभृन्निर्गुणो महान्।
अधृतः स्वधृतः स्वास्यः।प्राग्वंशो वंशवर्धनः॥ (९० श्लोक)

सर्व रोग निवारण:
प्रमाणं प्राणनिलयः।प्राणभृत् प्राणजीवनः।
तत्त्वं तत्त्वविदेकात्मा।जन्म मृत्युजरातिगः॥ (१०३ श्लोक)

पाप नाशन:
आत्म योनिः स्वयंजातो।वैखानः सामगायनः।
देवकीनंदनः स्रष्टा।क्षितीशः पापनाशनः॥  (१०६ श्लोक)

सुख प्रसव:
शंखभृन्नंदकी चक्री।शाङ्ग९धन्वा गदाधरः।
रथांगपाणिरक्षोभ्यः।सर्वप्रहरणायुधः॥  (१०७ श्लोक)

                                                                                                             
॥ ಹರಿಃ ಓಂ ॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಅಶ್ವಿನಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಚೂ
ವಿಶ್ವಂ ವಿಷ್ಣುರ್ವಷಟ್ಕಾರೋ ಭೂತಭವ್ಯಭವತ್ಪ್ರಭುಃ |  
ಭೂತಕೃದ್ಭೂತಭೃದ್ಭಾವೋ ಭೂತಾತ್ಮಾ ಭೂತಭಾವನಃ ॥೧॥

ಮೇಷ ಅಶ್ವಿನಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಚೆ 
ಭೂತಾತ್ಮಾ ಪರಮಾತ್ಮಾ ಚ ಮುಕ್ತಾನಾಂ ಪರಮಾ ಗತಿಃ |  
ಅವ್ಯಯಃ ಪುರುಷಃ ಸಾಕ್ಷೀ ಕ್ಷೇತ್ರಜ್ಞೋಽಕ್ಷರ ಏವ ಚ ॥೨॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಅಶ್ವಿನಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಚೋ
ಯೋಗೋ ಯೋಗವಿದಾಂ ನೇತಾ ಪ್ರಧಾನಪುರುಷೇಶ್ವರಃ |  
ನಾರಸಿಂಹವಪುಃ ಶ್ರೀಮಾನ್ ಕೇಶವಃ ಪುರುಷೋತ್ತಮಃ ॥೩॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಅಶ್ವಿನಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಲಾ
ಸರ್ವಃ ಶರ್ವಃ ಶಿವಃ ಸ್ಥಾಣುರ್ಭೂತಾದಿರ್ನಿಧಿರವ್ಯಯಃ |  
ಸಂಭವೋ ಭಾವನೋ ಭರ್ತಾ ಪ್ರಭವಃ ಪ್ರಭುರೀಶ್ವರಃ ॥೪॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಭರಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಲೀ
ಸ್ವಯಂಭೂಃ ಶಂಭುರಾದಿತ್ಯಃ ಪುಷ್ಕರಾಕ್ಷೋ ಮಹಾಸ್ವನಃ |  
ಅನಾದಿನಿಧನೋ ಧಾತಾ ವಿಧಾತಾ ಧಾತುರುತ್ತಮಃ ॥೫॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಭರಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಲೂ  
ಅಪ್ರಮೇಯೋ ಹೃಷೀಕೇಶಃ ಪದ್ಮನಾಭೋಽಮರಪ್ರಭುಃ |  
ವಿಶ್ವಕರ್ಮಾ ಮನುಸ್ತ್ವಷ್ಟಾ ಸ್ಥವಿಷ್ಠಃ ಸ್ಥವಿರೋ ಧ್ರುವಃ ॥೬॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಭರಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಲೆ
ಅಗ್ರಾಹ್ಯಃ ಶಾಶ್ವತಃ ಕೃಷ್ಣೋ ಲೋಹಿತಾಕ್ಷಃ ಪ್ರತರ್ದನಃ |  
ಪ್ರಭೂತಸ್ತ್ರಿಕಕುಬ್ಧಾಮ ಪವಿತ್ರಂ ಮಂಗಳಂ ಪರಮ್ ॥೭॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಭರಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಲೋ
ಈಶಾನಃ ಪ್ರಾಣದಃ ಪ್ರಾಣೋ ಜ್ಯೇಷ್ಠಃ ಶ್ರೇಷ್ಠಃ ಪ್ರಜಾಪತಿಃ |  
ಹಿರಣ್ಯಗರ್ಭೋ ಭೂಗರ್ಭೋ ಮಾಧವೋ ಮಧುಸೂದನಃ ॥೮॥

ಮೇಷ ರಾಶಿ, ಕೃತ್ತಿಕಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಆ 
ಈಶ್ವರೋ ವಿಕ್ರಮೀ ಧನ್ವೀ ಮೇಧಾವೀ ವಿಕ್ರಮಃ ಕ್ರಮಃ |  
ಅನುತ್ತಮೋ ದುರಾಧರ್ಷಃ ಕೃತಜ್ಞಃ ಕೃತಿರಾತ್ಮವಾನ್ ॥೯॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ಕೃತ್ತಿಕಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಈ
ಸುರೇಶಃ ಶರಣಂ ಶರ್ಮ ವಿಶ್ವರೇತಾಃ ಪ್ರಜಾಭವಃ |  
ಅಹಃ ಸಂವತ್ಸರೋ ವ್ಯಾಲಃ ಪ್ರತ್ಯಯಃ ಸರ್ವದರ್ಶನಃ ॥೧೦॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ಕೃತ್ತಿಕಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಊ
ಅಜಃ ಸರ್ವೇಶ್ವರಃ ಸಿದ್ಧಃ ಸಿದ್ಧಿಃ ಸರ್ವಾದಿರಚ್ಯುತಃ |  
ವೃಷಾಕಪಿರಮೇಯಾತ್ಮಾ ಸರ್ವಯೋಗವಿನಿಃಸೃತಃ ॥೧೧॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ಕೃತ್ತಿಕಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಎ
ವಸುರ್ವಸುಮನಾಃ ಸತ್ಯಃ ಸಮಾತ್ಮಾಽಸಮ್ಮಿತಃ ಸಮಃ |  
ಅಮೋಘಃ ಪುಂಡರೀಕಾಕ್ಷೋ ವೃಷಕರ್ಮಾ ವೃಷಾಕೃತಿಃ ॥೧೨॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ರೋಹಿಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಓ
ರುದ್ರೋ ಬಹುಶಿರಾ ಬಭ್ರುರ್ವಿಶ್ವಯೋನಿಃ ಶುಚಿಶ್ರವಾಃ |  
ಅಮೃತಃ ಶಾಶ್ವತಃ ಸ್ಥಾಣುರ್ವರಾರೋಹೋ ಮಹಾತಪಾಃ ॥೧೩॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ರೋಹಿಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ವಾ  
ಸರ್ವಗಃ ಸರ್ವವಿದ್ಭಾನುರ್ವಿಷ್ವಕ್ಸೇನೋ ಜನಾರ್ದನಃ |  
ವೇದೋ ವೇದವಿದವ್ಯಂಗೋ ವೇದಾಂಗೋ ವೇದವಿತ್ ಕವಿಃ ॥೧೪॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ರೋಹಿಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ವೀ
ಲೋಕಾಧ್ಯಕ್ಷಃ ಸುರಾಧ್ಯಕ್ಷೋ ಧರ್ಮಾಧ್ಯಕ್ಷಃ ಕೃತಾಕೃತಃ |  
ಚತುರಾತ್ಮಾ ಚತುರ್ವ್ಯೂಹಶ್ಚತುರ್ದಂಷ್ಟ್ರಶ್ಚತುರ್ಭುಜಃ ॥೧೫॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ರೋಹಿಣಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ವೂ
ಭ್ರಾಜಿಷ್ಣುರ್ಭೋಜನಂ ಭೋಕ್ತಾ ಸಹಿಷ್ಣುರ್ಜಗದಾದಿಜಃ |  
ಅನಘೋ ವಿಜಯೋ ಜೇತಾ ವಿಶ್ವಯೋನಿಃ ಪುನರ್ವಸುಃ ॥೧೬॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ಮೃಗಶಿರ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ವೇ  
ಉಪೇಂದ್ರೋ ವಾಮನಃ ಪ್ರಾಂಶುರಮೋಘಃ ಶುಚಿರೂರ್ಜಿತಃ |  
ಅತೀಂದ್ರಃ ಸಂಗ್ರಹಃ ಸರ್ಗೋ ಧೃತಾತ್ಮಾ ನಿಯಮೋ ಯಮಃ ॥೧೭॥

ವೃಷಭ ರಾಶಿ, ಮೃಗಶಿರ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ವೋ 
ವೇದ್ಯೋ ವೈದ್ಯಃ ಸದಾಯೋಗೀ ವೀರಹಾ ಮಾಧವೋ ಮಧುಃ |  ಅತೀಂದ್ರಿಯೋ ಮಹಾಮಾಯೋ ಮಹೋತ್ಸಾಹೋ ಮಹಾಬಲಃ ॥೧೮॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಮೃಗಶಿರ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಕಾ
ಮಹಾಬುದ್ಧಿರ್ಮಹಾವೀರ್ಯೋ ಮಹಾಶಕ್ತಿರ್ಮಹಾದ್ಯುತಿಃ |  
ಅನಿರ್ದೇಶ್ಯವಪುಃ ಶ್ರೀಮಾನಮೇಯಾತ್ಮಾ ಮಹಾದ್ರಿಧೃಕ್ ॥೧೯॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಮೃಗಶಿರ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಕೀ
ಮಹೇಷ್ವಾಸೋ ಮಹೀಭರ್ತಾ ಶ್ರೀನಿವಾಸಃ ಸತಾಂ ಗತಿಃ |  
ಅನಿರುದ್ಧಃ ಸುರಾನಂದೋ ಗೋವಿಂದೋ ಗೋವಿದಾಂ ಪತಿಃ ॥೨೦॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಆರ್ದ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಕೂ
ಮರೀಚಿರ್ದಮನೋ ಹಂಸಃ ಸುಪರ್ಣೋ ಭುಜಗೋತ್ತಮಃ |  
ಹಿರಣ್ಯನಾಭಃ ಸುತಪಾಃ ಪದ್ಮನಾಭಃ ಪ್ರಜಾಪತಿಃ ॥೨೧॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಆರ್ದ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಘ
ಅಮೃತ್ಯುಃ ಸರ್ವದೃಕ್ ಸಿಂಹಃ ಸಂಧಾತಾ ಸಂಧಿಮಾನ್ ಸ್ಥಿರಃ |  
ಅಜೋ ದುರ್ಮರ್ಷಣಃ ಶಾಸ್ತಾ ವಿಶ್ರುತಾತ್ಮಾ ಸುರಾರಿಹಾ ॥೨೨॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಆರ್ದ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಙ
ಗುರುರ್ಗುರುತಮೋ ಧಾಮ ಸತ್ಯಃ ಸತ್ಯಪರಾಕ್ರಮಃ |  
ನಿಮಿಷೋಽನಿಮಿಷಃ ಸ್ರಗ್ವೀ ವಾಚಸ್ಪತಿರುದಾರಧೀಃ ॥೨೩॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಆರ್ದ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಛ 
ಅಗ್ರಣೀರ್ಗ್ರಾಮಣೀಃ ಶ್ರೀಮಾನ್ ನ್ಯಾಯೋ ನೇತಾ ಸಮೀರಣಃ |  ಸಹಸ್ರಮೂರ್ಧಾ ವಿಶ್ವಾತ್ಮಾ ಸಹಸ್ರಾಕ್ಷಃ ಸಹಸ್ರಪಾತ್ ॥೨೪॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಪುನರ್ವಸು ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಕೆ
ಆವರ್ತನೋ ನಿವೃತ್ತಾತ್ಮಾ ಸಂವೃತಃ ಸಂಪ್ರಮರ್ದನಃ |  
ಅಹಃ ಸಂವರ್ತಕೋ ವಹ್ನಿರನಿಲೋ ಧರಣೀಧರಃ ॥೨೫॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಪುನರ್ವಸು ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಕೋ
ಸುಪ್ರಸಾದಃ ಪ್ರಸನ್ನಾತ್ಮಾ ವಿಶ್ವಧೃಗ್ವಿಶ್ವಭುಗ್ವಿಭುಃ |  ಸತ್ಕರ್ತಾ ಸತ್ಕೃತಃ ಸಾಧುರ್ಜಹ್ನುರ್ಣಾರಾಯಣೋ ನರಃ ॥೨೬॥

ಮಿಥುನ ರಾಶಿ, ಪುನರ್ವಸು ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಹಾ
ಅಸಂಖ್ಯೇಯೋಽಪ್ರಮೇಯಾತ್ಮಾ ವಿಶಿಷ್ಟಃ ಶಿಷ್ಟಕೃಚ್ಛುಚಿಃ |  
ಸಿದ್ಧಾರ್ಥಃ ಸಿದ್ಧಸಂಕಲ್ಪಃ ಸಿದ್ಧಿದಃ ಸಿದ್ಧಿಸಾಧನಃ ॥೨೭॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಪುನರ್ವಸು ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಹೀ
ವೃಷಾಹೀ ವೃಷಭೋ ವಿಷ್ಣುರ್ವೃಷಪರ್ವಾ ವೃಷೋದರಃ |  
ವರ್ಧನೋ ವರ್ಧಮಾನಶ್ಚ ವಿವಿಕ್ತಃ ಶ್ರುತಿಸಾಗರಃ ॥೨೮॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಪುಷ್ಯ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಹೂ
ಸುಭುಜೋ ದುರ್ಧರೋ ವಾಗ್ಮೀ ಮಹೇಂದ್ರೋ ವಸುದೋ ವಸುಃ |  ನೈಕರೂಪೋ ಬೃಹದ್ರೂಪಃ ಶಿಪಿವಿಷ್ಟಃ ಪ್ರಕಾಶನಃ ॥೨೯॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಪುಷ್ಯ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಹೇ
ಓಜಸ್ತೇಜೋದ್ಯುತಿಧರಃ ಪ್ರಕಾಶಾತ್ಮಾ ಪ್ರತಾಪನಃ |  
ಋದ್ಧಃ ಸ್ಪಷ್ಟಾಕ್ಷರೋ ಮಂತ್ರಶ್ಚಂದ್ರಾಂಶುರ್ಭಾಸ್ಕರದ್ಯುತಿಃ ॥೩೦॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಪುಷ್ಯ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಹೋ
ಅಮೃತಾಂಶೂದ್ಭವೋ ಭಾನುಃ ಶಶಬಿಂದುಃ ಸುರೇಶ್ವರಃ |  
ಔಷಧಂ ಜಗತಃ ಸೇತುಃ ಸತ್ಯಧರ್ಮಪರಾಕ್ರಮಃ ॥೩೧॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಪುಷ್ಯ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಡಾ 
ಭೂತಭವ್ಯಭವನ್ನಾಥಃ ಪವನಃ ಪಾವನೋಽನಲಃ |  
ಕಾಮಹಾ ಕಾಮಕೃತ್ಕಾಂತಃ ಕಾಮಃ ಕಾಮಪ್ರದಃ ಪ್ರಭುಃ ॥೩೨॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಆಶ್ಲೇಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಡೀ 
ಯುಗಾದಿಕೃದ್ಯುಗಾವರ್ತೋ ನೈಕಮಾಯೋ ಮಹಾಶನಃ |  
ಅದೃಶ್ಯೋ ವ್ಯಕ್ತರೂಪಶ್ಚ ಸಹಸ್ರಜಿದನಂತಜಿತ್ ॥೩೩॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಆಶ್ಲೇಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಡೂ  
ಇಷ್ಟೋಽವಿಶಿಷ್ಟಃ ಶಿಷ್ಟೇಷ್ಟಃ ಶಿಖಂಡೀ ನಹುಷೋ ವೃಷಃ |  
ಕ್ರೋಧಹಾ ಕ್ರೋಧಕೃತ್ಕರ್ತಾ ವಿಶ್ವಬಾಹುರ್ಮಹೀಧರಃ ॥೩೪॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಆಶ್ಲೇಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಡೇ
ಅಚ್ಯುತಃ ಪ್ರಥಿತಃ ಪ್ರಾಣಃ ಪ್ರಾಣದೋ ವಾಸವಾನುಜಃ |  
ಅಪಾಂನಿಧಿರಧಿಷ್ಠಾನಮಪ್ರಮತ್ತಃ ಪ್ರತಿಷ್ಠಿತಃ ॥೩೫॥

ಕರ್ಕ ರಾಶಿ, ಆಶ್ಲೇಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಡೋ 
ಸ್ಕಂದಃ ಸ್ಕಂದಧರೋ ಧುರ್ಯೋ ವರದೋ ವಾಯುವಾಹನಃ |  
ವಾಸುದೇವೋ ಬೃಹದ್ಭಾನುರಾದಿದೇವಃ ಪುರಂದರಃ ॥೩೬॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಮಘಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಮಾ 
ಅಶೋಕಸ್ತಾರಣಸ್ತಾರಃ ಶೂರಃ ಶೌರಿರ್ಜನೇಶ್ವರಃ |  
ಅನುಕೂಲಃ ಶತಾವರ್ತಃ ಪದ್ಮೀ ಪದ್ಮನಿಭೇಕ್ಷಣಃ ॥೩೭॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಮಘಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಮೀ
ಪದ್ಮನಾಭೋಽರವಿಂದಾಕ್ಷಃ ಪದ್ಮಗರ್ಭಃ ಶರೀರಭೃತ್ |  
ಮಹರ್ದ್ಧಿರೃದ್ಧೋ ವೃದ್ಧಾತ್ಮಾ ಮಹಾಕ್ಷೋ ಗರುಡಧ್ವಜಃ ॥೩೮॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಮಘಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಮೂ
ಅತುಲಃ ಶರಭೋ ಭೀಮಃ ಸಮಯಜ್ಞೋ ಹವಿರ್ಹರಿಃ |  
ಸರ್ವಲಕ್ಷಣಲಕ್ಷಣ್ಯೋ ಲಕ್ಷ್ಮೀವಾನ್ ಸಮಿತಿಂಜಯಃ ॥೩೯॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಮಘಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಮೇ
ವಿಕ್ಷರೋ ರೋಹಿತೋ ಮಾರ್ಗೋ ಹೇತುರ್ದಾಮೋದರಃ ಸಹಃ |  ಮಹೀಧರೋ ಮಹಾಭಾಗೋ ವೇಗವಾನಮಿತಾಶನಃ ॥೪೦॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಮೋ
ಉದ್ಭವಃ ಕ್ಷೋಭಣೋ ದೇವಃ ಶ್ರೀಗರ್ಭಃ ಪರಮೇಶ್ವರಃ |  
ಕರಣಂ ಕಾರಣಂ ಕರ್ತಾ ವಿಕರ್ತಾ ಗಹನೋ ಗುಹಃ ॥೪೧॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಟಾ  
ವ್ಯವಸಾಯೋ ವ್ಯವಸ್ಥಾನಃ ಸಂಸ್ಥಾನಃ ಸ್ಥಾನದೋ ಧ್ರುವಃ |  
ಪರದ್ಧಿಃ ಪರಮಸ್ಪಷ್ಟಸ್ತುಷ್ಟಃ ಪುಷ್ಟಃ ಶುಭೇಕ್ಷಣಃ ॥೪೨॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಟೀ
ರಾಮೋ ವಿರಾಮೋ ವಿರಜೋ ಮಾರ್ಗೋ ನೇಯೋ ನಯೋಽನಯಃ |  ವೀರಃ ಶಕ್ತಿಮತಾಂ ಶ್ರೇಷ್ಠೋ ಧರ್ಮೋ ಧರ್ಮವಿದುತ್ತಮಃ ॥೪೩॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಟೂ 
ವೈಕುಂಠಃ ಪುರುಷಃ ಪ್ರಾಣಃ ಪ್ರಾಣದಃ ಪ್ರಣವಃ ಪೃಥುಃ |  
ಹಿರಣ್ಯಗರ್ಭಃ ಶತ್ರುಘ್ನೋ ವ್ಯಾಪ್ತೋ ವಾಯುರಧೋಕ್ಷಜಃ ॥೪೪॥

ಸಿಂಹ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಟೆ
ಋತುಃ ಸುದರ್ಶನಃ ಕಾಲಃ ಪರಮೇಷ್ಠೀ ಪರಿಗ್ರಹಃ |  
ಉಗ್ರಃ ಸಂವತ್ಸರೋ ದಕ್ಷೋ ವಿಶ್ರಾಮೋ ವಿಶ್ವದಕ್ಷಿಣಃ ॥೪೫॥

ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಟೋ
ವಿಸ್ತಾರಃ ಸ್ಥಾವರಸ್ಥಾಣುಃ ಪ್ರಮಾಣಂ ಬೀಜಮವ್ಯಯಮ್ |  
ಅರ್ಥೋಽನರ್ಥೋ ಮಹಾಕೋಶೋ ಮಹಾಭೋಗೋ ಮಹಾಧನಃ ॥೪೬॥

ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಪಾ
ಅನಿರ್ವಿಣ್ಣಃ ಸ್ಥವಿಷ್ಠೋಽಭೂರ್ಧರ್ಮಯೂಪೋ ಮಹಾಮಖಃ |  ನಕ್ಷತ್ರನೇಮಿರ್ನಕ್ಷತ್ರೀ ಕ್ಷಮಃ ಕ್ಷಾಮಃ ಸಮೀಹನಃ ॥೪೭॥

ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಪೀ
ಯಜ್ಞ ಇಜ್ಯೋ ಮಹೇಜ್ಯಶ್ಚ ಕ್ರತುಃ ಸತ್ರಂ ಸತಾಂ ಗತಿಃ |  
ಸರ್ವದರ್ಶೀ ವಿಮುಕ್ತಾತ್ಮಾ ಸರ್ವಜ್ಞೋ ಜ್ಞಾನಮುತ್ತಮಮ್ ॥೪೮॥

ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಹಸ್ತಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಪೂ
ಸುವ್ರತಃ ಸುಮುಖಃ ಸೂಕ್ಷ್ಮಃ ಸುಗೋಷಃ ಸುಖದಃ ಸುಹೃತ್ |  
ಮನೋಹರೋ ಜಿತಕ್ರೋಧೋ ವೀರಬಾಹುರ್ವಿದಾರಣಃ ॥೪೯॥

ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಹಸ್ತಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಷಾ
ಸ್ವಾಪನಃ ಸ್ವವಶೋ ವ್ಯಾಪೀ ನೈಕಾತ್ಮಾ ನೈಕಕರ್ಮಕೃತ್ |  
ವತ್ಸರೋ ವತ್ಸಲೋ ವತ್ಸೀ ರತ್ನಗರ್ಭೋ ಧನೇಶ್ವರಃ ॥೫೦॥

ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಹಸ್ತಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಣಾ
ಧರ್ಮಗುಬ್ಧರ್ಮಕೃದ್ಧರ್ಮೀ ಸದಸತ್ಕ್ಷರಮಕ್ಷರಮ್ |  
ಅವಿಜ್ಞಾತಾ ಸಹಸ್ರಾಂಶುರ್ವಿಧಾತಾ ಕೃತಲಕ್ಷಣಃ ॥೫೧॥

ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಹಸ್ತಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಠಾ
ಗಭಸ್ತಿನೇಮಿಃ ಸತ್ವಸ್ಥಃ ಸಿಂಹೋ ಭೂತಮಹೇಶ್ವರಃ |  
ಆದಿದೇವೋ ಮಹಾದೇವೋ ದೇವೇಶೋ ದೇವಭೃದ್ಗುರುಃ ॥೫೨॥

*ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಚಿತ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಪೆ*  
ಉತ್ತರೋ ಗೋಪತಿರ್ಗೋಪ್ತಾ ಜ್ಞಾನಗಮ್ಯಃ ಪುರಾತನಃ |  
ಶರೀರಭೂತಭೃದ್ಭೋಕ್ತಾ ಕಪೀಂದ್ರೋ ಭೂರಿದಕ್ಷಿಣಃ ॥೫೩॥

*ಕನ್ಯಾ ರಾಶಿ, ಚಿತ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಪೋ*  
ಸೋಮಪೋಽಮೃತಪಃ ಸೋಮಃ ಪುರುಜಿತ್ಪುರುಸತ್ತಮಃ |  
ವಿನಯೋ ಜಯಃ ಸತ್ಯಸಂಧೋ ದಾಶಾರ್ಹಃ ಸಾತ್ವತಾಂಪತಿಃ ॥೫೪॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ಚಿತ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ರಾ*  
ಜೀವೋ ವಿನಯಿತಾ ಸಾಕ್ಷೀ ಮುಕುಂದೋಽಮಿತವಿಕ್ರಮಃ |  
ಅಂಭೋನಿಧಿರನಂತಾತ್ಮಾ ಮಹೋದಧಿಶಯೋಽಂತಕಃ ॥೫೫॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ಚಿತ್ರಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ರೀ*  
ಅಜೋ ಮಹಾರ್ಹಃ ಸ್ವಾಭಾವ್ಯೋ ಜಿತಾಮಿತ್ರಃ ಪ್ರಮೋದನಃ |  
ಆನಂದೋ ನಂದನೋ ನಂದಃ ಸತ್ಯಧರ್ಮಾ ತ್ರಿವಿಕ್ರಮಃ ॥೫೬॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ಸ್ವಾತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ರು*  
ಮಹರ್ಷಿಃ ಕಪಿಲಾಚಾರ್ಯಃ ಕೃತಜ್ಞೋ ಮೇದಿನೀಪತಿಃ |  
ತ್ರಿಪದಸ್ತ್ರಿದಶಾಧ್ಯಕ್ಷೋ ಮಹಾಶೃಂಗಃ ಕೃತಾಂತಕೃತ್ ॥೫೭॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ಸ್ವಾತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ರೇ*  
ಮಹಾವರಾಹೋ ಗೋವಿಂದಃ ಸುಷೇಣಃ ಕನಕಾಂಗದೀ |  
ಗುಹ್ಯೋ ಗಂಭೀರೋ ಗಹನೋ ಗುಪ್ತಶ್ಚಕ್ರಗದಾಧರಃ ॥೫೮॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ಸ್ವಾತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ರೋ*  
ವೇಧಾಃ ಸ್ವಾಂಗೋಽಜಿತಃ ಕೃಷ್ಣೋ ದೃಢಃ ಸಂಕರ್ಷಣೋಽಚ್ಯುತಃ |  ವರುಣೋ ವಾರುಣೋ ವೃಕ್ಷಃ ಪುಷ್ಕರಾಕ್ಷೋ ಮಹಾಮನಾಃ ॥೫೯॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ಸ್ವಾತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ತಾ*  
ಭಗವಾನ್ ಭಗಹಾಽಽನಂದೀ ವನಮಾಲೀ ಹಲಾಯುಧಃ |  
ಆದಿತ್ಯೋ ಜ್ಯೋತಿರಾದಿತ್ಯಃ ಸಹಿಷ್ಣುರ್ಗತಿಸತ್ತಮಃ ॥೬೦॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ವಿಶಾಖಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ತೀ*  
ಸುಧನ್ವಾ ಖಂಡಪರಶುರ್ದಾರುಣೋ ದ್ರವಿಣಪ್ರದಃ |  
ದಿವಃಸ್ಪೃಕ್ ಸರ್ವದೃಗ್ವ್ಯಾಸೋ ವಾಚಸ್ಪತಿರಯೋನಿಜಃ ॥೬೧॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ವಿಶಾಖಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ತೂ*  
ತ್ರಿಸಾಮಾ ಸಾಮಗಃ ಸಾಮ ನಿರ್ವಾಣಂ ಭೇಷಜಂ ಭಿಷಕ್ |  
ಸನ್ಯಾಸಕೃಚ್ಛಮಃ ಶಾಂತೋ ನಿಷ್ಠಾ ಶಾಂತಿಃ ಪರಾಯಣಮ್ ॥೬೨॥

*ತುಲಾ ರಾಶಿ, ವಿಶಾಖಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ತೇ*  
ಶುಭಾಂಗಃ ಶಾಂತಿದಃ ಸ್ರಷ್ಟಾ ಕುಮುದಃ ಕುವಲೇಶಯಃ |  
ಗೋಹಿತೋ ಗೋಪತಿರ್ಗೋಪ್ತಾ ವೃಷಭಾಕ್ಷೋ ವೃಷಪ್ರಿಯಃ ॥೬೩॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ವಿಶಾಖಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ತೋ*  
ಅನಿವರ್ತೀ ನಿವೃತ್ತಾತ್ಮಾ ಸಂಕ್ಷೇಪ್ತಾ ಕ್ಷೇಮಕೃಚ್ಛಿವಃ |  
ಶ್ರೀವತ್ಸವಕ್ಷಾಃ ಶ್ರೀವಾಸಃ ಶ್ರೀಪತಿಃ ಶ್ರೀಮತಾಂವರಃ ॥೬೪॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಅನುರಾಧಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ನಾ*  
ಶ್ರೀದಃ ಶ್ರೀಶಃ ಶ್ರೀನಿವಾಸಃ ಶ್ರೀನಿಧಿಃ ಶ್ರೀವಿಭಾವನಃ |  
ಶ್ರೀಧರಃ ಶ್ರೀಕರಃ ಶ್ರೇಯಃ ಶ್ರೀಮಾನ್ ಲೋಕತ್ರಯಾಶ್ರಯಃ ॥೬೫॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಅನುರಾಧಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ನೀ*  
ಸ್ವಕ್ಷಃ ಸ್ವಂಗಃ ಶತಾನಂದೋ ನಂದಿರ್ಜ್ಯೋತಿರ್ಗಣೇಶ್ವರಃ |  
ವಿಜಿತಾತ್ಮಾಽವಿಧೇಯಾತ್ಮಾ ಸತ್ಕೀರ್ತಿಶ್ಚ್ಛಿನ್ನಸಂಶಯಃ ॥೬೬॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಅನುರಾಧಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ನೂ*  
ಉದೀರ್ಣಃ ಸರ್ವತಶ್ಚಕ್ಷುರನೀಶಃ ಶಾಶ್ವತಸ್ಥಿರಃ |  
ಭೂಶಯೋ ಭೂಷಣೋ ಭೂತಿರ್ವಿಶೋಕಃ ಶೋಕನಾಶನಃ ॥೬೭॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಅನುರಾಧಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ನೇ*  
ಅರ್ಚಿಷ್ಮಾನರ್ಚಿತಃ ಕುಂಭೋ ವಿಶುದ್ಧಾತ್ಮಾ ವಿಶೋಧನಃ |  
ಅನಿರುದ್ಧೋಽಪ್ರತಿರಥಃ ಪ್ರದ್ಯುಮ್ನೋಽಮಿತವಿಕ್ರಮಃ ॥೬೮॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಜ್ಯೇಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ನೋ*  
ಕಾಲನೇಮಿನಿಹಾ ವೀರಃ ಶೌರಿಃ ಶೂರಜನೇಶ್ವರಃ |  
ತ್ರಿಲೋಕಾತ್ಮಾ ತ್ರಿಲೋಕೇಶಃ ಕೇಶವಃ ಕೇಶಿಹಾ ಹರಿಃ ॥೬೯॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಜ್ಯೇಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಯಾ*  
ಕಾಮದೇವಃ ಕಾಮಪಾಲಃ ಕಾಮೀ ಕಾಂತಃ ಕೃತಾಗಮಃ |  
ಅನಿರ್ದೇಶ್ಯವಪುರ್ವಿಷ್ಣುರ್ವೀರೋಽನಂತೋ ಧನಂಜಯಃ ॥೭೦॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಜ್ಯೇಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಯೀ*  
ಬ್ರಹ್ಮಣ್ಯೋ ಬ್ರಹ್ಮಕೃದ್ ಬ್ರಹ್ಮಾ ಬ್ರಹ್ಮ ಬ್ರಹ್ಮವಿವರ್ಧನಃ |  
ಬ್ರಹ್ಮವಿದ್ ಬ್ರಾಹ್ಮಣೋ ಬ್ರಹ್ಮೀ ಬ್ರಹ್ಮಜ್ಞೋ ಬ್ರಾಹ್ಮಣಪ್ರಿಯಃ ॥೭೧॥

*ವೃಶ್ಚಿಕ ರಾಶಿ, ಜ್ಯೇಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಯೂ*  
ಮಹಾಕ್ರಮೋ ಮಹಾಕರ್ಮಾ ಮಹಾತೇಜಾ ಮಹೋರಗಃ |  
ಮಹಾಕ್ರತುರ್ಮಹಾಯಜ್ವಾ ಮಹಾಯಜ್ಞೋ ಮಹಾಹವಿಃ ॥೭೨॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಮೂಲಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಯೇ*  
ಸ್ತವ್ಯಃ ಸ್ತವಪ್ರಿಯಃ ಸ್ತೋತ್ರಂ ಸ್ತುತಿಃ ಸ್ತೋತಾ ರಣಪ್ರಿಯಃ |  
ಪೂರ್ಣಃ ಪೂರಯಿತಾ ಪುಣ್ಯಃ ಪುಣ್ಯಕೀರ್ತಿರನಾಮಯಃ ॥೭೩॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಮೂಲಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಯೋ*  
ಮನೋಜವಸ್ತೀರ್ಥಕರೋ ವಸುರೇತಾ ವಸುಪ್ರದಃ |  
ವಸುಪ್ರದೋ ವಾಸುದೇವೋ ವಸುರ್ವಸುಮನಾ ಹವಿಃ ॥೭೪॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಮೂಲಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಭಾ*  
ಸದ್ಗತಿಃ ಸತ್ಕೃತಿಃ ಸತ್ತಾ ಸದ್ಭೂತಿಃ ಸತ್ಪರಾಯಣಃ |  
ಶೂರಸೇನೋ ಯದುಶ್ರೇಷ್ಠಃ ಸನ್ನಿವಾಸಃ ಸುಯಾಮುನಃ ॥೭೫॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಮೂಲಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಭೀ*  
ಭೂತಾವಾಸೋ ವಾಸುದೇವಃ ಸರ್ವಾಸುನಿಲಯೋಽನಲಃ |  
ದರ್ಪಹಾ ದರ್ಪದೋ ದೃಪ್ತೋ ದುರ್ಧರೋಽಥಾಪರಾಜಿತಃ ॥೭೬॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಭೂ*  
ವಿಶ್ವಮೂರ್ತಿರ್ಮಹಾಮೂರ್ತಿರ್ದೀಪ್ತಮೂರ್ತಿರಮೂರ್ತಿಮಾನ್ |  ಅನೇಕಮೂರ್ತಿರವ್ಯಕ್ತಃ ಶತಮೂರ್ತಿಃ ಶತಾನನಃ ॥೭೭॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಧಾ*  
ಏಕೋ ನೈಕಃ ಸವಃ ಕಃ ಕಿಂ ಯತ್ ತತ್ಪದಮನುತ್ತಮಮ್ |  
ಲೋಕಬಂಧುರ್ಲೋಕನಾಥೋ ಮಾಧವೋ ಭಕ್ತವತ್ಸಲಃ ॥೭೮॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಫಾ*  
ಸುವರ್ಣವರ್ಣೋ ಹೇಮಾಂಗೋ ವರಾಂಗಶ್ಚಂದನಾಂಗದೀ |  
ವೀರಹಾ ವಿಷಮಃ ಶೂನ್ಯೋ ಘೃತಾಶೀರಚಲಶ್ಚಲಃ ॥೭೯॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಢಾ*  
ಅಮಾನೀ ಮಾನದೋ ಮಾನ್ಯೋ ಲೋಕಸ್ವಾಮೀ ತ್ರಿಲೋಕಧೃಕ್ |  ಸುಮೇಧಾ ಮೇಧಜೋ ಧನ್ಯಃ ಸತ್ಯಮೇಧಾ ಧರಾಧರಃ ॥೮೦॥

*ಧನು ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಭೇ*  
ತೇಜೋವೃಷೋ ದ್ಯುತಿಧರಃ ಸರ್ವಶಸ್ತ್ರಭೃತಾಂ ವರಃ |  
ಪ್ರಗ್ರಹೋ ನಿಗ್ರಹೋ ವ್ಯಗ್ರೋ ನೈಕಶೃಂಗೋ ಗದಾಗ್ರಜಃ ॥೮೧॥

ಮಕರ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಭೋ
ಚತುರ್ಮೂರ್ತಿಶ್ಚತುರ್ಬಾಹುಶ್ಚತುರ್ವ್ಯೂಹಶ್ಚತುರ್ಗತಿಃ |  
ಚತುರಾತ್ಮಾ ಚತುರ್ಭಾವಶ್ಚತುರ್ವೇದವಿದೇಕಪಾತ್ ॥೮೨॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಜಾ*  
ಸಮಾವರ್ತೋಽನಿವೃತ್ತಾತ್ಮಾ ದುರ್ಜಯೋ ದುರತಿಕ್ರಮಃ |  
ದುರ್ಲಭೋ ದುರ್ಗಮೋ ದುರ್ಗೋ ದುರಾವಾಸೋ ದುರಾರಿಹಾ ॥೮೩॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಷಾಢಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಜೀ*  
ಶುಭಾಂಗೋ ಲೋಕಸಾರಂಗಃ ಸುತಂತುಸ್ತಂತುವರ್ಧನಃ |  
ಇಂದ್ರಕರ್ಮಾ ಮಹಾಕರ್ಮಾ ಕೃತಕರ್ಮಾ ಕೃತಾಗಮಃ ॥೮೪॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಶ್ರವಣ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಖೀ*  
ಉದ್ಭವಃ ಸುಂದರಃ ಸುಂದೋ ರತ್ನನಾಭಃ ಸುಲೋಚನಃ |  
ಅರ್ಕೋ ವಾಜಸನಃ ಶೃಂಗೀ ಜಯಂತಃ ಸರ್ವವಿಜ್ಜಯೀ ॥೮೫॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಶ್ರವಣ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಖೂ*  
ಸುವರ್ಣಬಿಂದುರಕ್ಷೋಭ್ಯಃ ಸರ್ವವಾಗೀಶ್ವರೇಶ್ವರಃ |  
ಮಹಾಹ್ರದೋ ಮಹಾಗರ್ತೋ ಮಹಾಭೂತೋ ಮಹಾನಿಧಿಃ ॥೮೬॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಶ್ರವಣ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಖೇ*  
ಕುಮುದಃ ಕುಂದರಃ ಕುಂದಃ ಪರ್ಜನ್ಯಃ ಪಾವನೋಽನಿಲಃ |  
ಅಮೃತಾಂಶೋಽಮೃತವಪುಃ ಸರ್ವಜ್ಞಃ ಸರ್ವತೋಮುಖಃ ॥೮೭॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಶ್ರವಣ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಖೋ*  
ಸುಲಭಃ ಸುವ್ರತಃ ಸಿದ್ಧಃ ಶತ್ರುಜಿಚ್ಛತ್ರುತಾಪನಃ |  
ನ್ಯಗ್ರೋಧೋಽದುಂಬರೋಽಶ್ವತ್ಥಶ್ಚಾಣೂರಾಂಧ್ರನಿಷೂದನಃ ॥೮೮॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಧನಿಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಗಾ*  
ಸಹಸ್ರಾರ್ಚಿಃ ಸಪ್ತಜಿಹ್ವಃ ಸಪ್ತೈಧಾಃ ಸಪ್ತವಾಹನಃ |  
ಅಮೂರ್ತಿರನಘೋಽಚಿಂತ್ಯೋ ಭಯಕೃದ್ಭಯನಾಶನಃ ॥೮೯॥

*ಮಕರ ರಾಶಿ, ಧನಿಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಗೀ*  
ಅಣುರ್ಬೃಹತ್ ಕೃಶಃ ಸ್ಥೂಲೋ ಗುಣಭೃನ್ನಿರ್ಗುಣೋ ಮಹಾನ್ |  ಅಧೃತಃ ಸ್ವಧೃತಃ ಸ್ವಾಸ್ಯಃ ಪ್ರಾಗ್ವಂಶೋ ವಂಶವರ್ಧನಃ ॥೯೦॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಧನಿಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಗೂ*  
ಭಾರಭೃತ್ ಕಥಿತೋ ಯೋಗೀ ಯೋಗೀಶಃ ಸರ್ವಕಾಮದಃ |  
ಆಶ್ರಮಃ ಶ್ರಮಣಃ ಕ್ಷಾಮಃ ಸುಪರ್ಣೋ ವಾಯುವಾಹನಃ ॥೯೧॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಧನಿಷ್ಠಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಗೇ*  
ಧನುರ್ಧರೋ ಧನುರ್ವೇದೋ ದಂಡೋ ದಮಯಿತಾ ದಮಃ |  
ಅಪರಾಜಿತಃ ಸರ್ವಸಹೋ ನಿಯಂತಾಽನಿಯಮೋಽಯಮಃ ॥೯೨॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಶತಭಿಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಗೋ*  
ಸತ್ವವಾನ್ ಸಾತ್ವಿಕಃ ಸತ್ಯಃ ಸತ್ಯಧರ್ಮಪರಾಯಣಃ |  
ಅಭಿಪ್ರಾಯಃ ಪ್ರಿಯಾರ್ಹೋಽರ್ಹಃ ಪ್ರಿಯಕೃತ್ ಪ್ರೀತಿವರ್ಧನಃ ॥೯೩॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಶತಭಿಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಸಾ*  
ವಿಹಾಯಸಗತಿರ್ಜ್ಯೋತಿಃ ಸುರಚಿರ್ಹುತಭುಗ್ವಿಭುಃ |  
ರವಿರ್ವಿರೋಚನಃ ಸೂರ್ಯಃ ಸವಿತಾ ರವಿಲೋಚನಃ ॥೯೪॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಶತಭಿಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಸೀ*  
ಅನಂತೋ ಹುತಭುಗ್ಭೋಕ್ತಾ ಸುಖದೋ ನೈಕಜೋಽಗ್ರಜಃ |  
ಅನಿರ್ವಿಣ್ಣಃ ಸದಾಮರ್ಷೀ ಲೋಕಾಧಿಷ್ಠಾನಮದ್ಭುತಃ ॥೯೫॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಶತಭಿಷಾ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಸೂ*  
ಸನಾತ್ ಸನಾತನತಮಃ ಕಪಿಲಃ ಕಪಿರವ್ಯಯಃ |  
ಸ್ವಸ್ತಿದಃ ಸ್ವಸ್ತಿಕೃತ್ಸ್ವಸ್ತಿ ಸ್ವಸ್ತಿಭುಕ್ಸ್ವಸ್ತಿದಕ್ಷಿಣಃ ॥೯೬॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ಸೇ*  
ಅರೌದ್ರಃ ಕುಂಡಲೀ ಚಕ್ರೀ ವಿಕ್ರಮ್ಯೂರ್ಜಿತಶಾಸನಃ |  
ಶಬ್ದಾತಿಗಃ ಶಬ್ದಸಹಃ ಶಿಶಿರಃ ಶರ್ವರೀಕರಃ ॥೯೭॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಸೋ*  
ಅಕ್ರೂರಃ ಪೇಶಲೋ ದಕ್ಷೋ ದಕ್ಷಿಣಃ ಕ್ಷಮಿಣಾಂವರಃ |  
ವಿದ್ವತ್ತಮೋ ವೀತಭಯಃ ಪುಣ್ಯಶ್ರವಣಕೀರ್ತನಃ ॥೯೮॥

*ಕುಂಭ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ದಾ*  
ಉತ್ತಾರಣೋ ದುಷ್ಕೃತಿಹಾ ಪುಣ್ಯೋ ದುಃಸ್ವಪ್ನನಾಶನಃ |  
ವೀರಹಾ ರಕ್ಷಣಃ ಸಂತೋ ಜೀವನಃ ಪರ್ಯವಸ್ಥಿತಃ ॥೯೯॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ಪೂರ್ವಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ದೀ*  
ಅನಂತರೂಪೋಽನಂತಶ್ರೀರ್ಜಿತಮನ್ಯುರ್ಭಯಾಪಹಃ |  
ಚತುರಶ್ರೋ ಗಂಭೀರಾತ್ಮಾ ವಿದಿಶೋ ವ್ಯಾದಿಶೋ ದಿಶಃ ॥೧೦೦॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ದೂ*  
ಅನಾದಿರ್ಭೂರ್ಭುವೋ ಲಕ್ಷ್ಮೀಃ ಸುವೀರೋ ರುಚಿರಾಂಗದಃ |  
ಜನೋ ಜನಜನ್ಮಾದಿರ್ಭೀಮೋ ಭೀಮಪರಾಕ್ರಮಃ ॥೧೦೧॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ಝ*  
ಆಧಾರನಿಲಯೋಽಧಾತಾ ಪುಷ್ಪಹಾಸಃ ಪ್ರಜಾಗರಃ |  
ಊರ್ಧ್ವಗಃ ಸತ್ಪಥಾಚಾರಃ ಪ್ರಾಣದಃ ಪ್ರಣವಃ ಪಣಃ ॥೧೦೨॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಞ*  
ಪ್ರಮಾಣಂ ಪ್ರಾಣನಿಲಯಃ ಪ್ರಾಣಭೃತ್ ಪ್ರಾಣಜೀವನಃ |  
ತತ್ವಂ ತತ್ವವಿದೇಕಾತ್ಮಾ ಜನ್ಮಮೃತ್ಯುಜರಾತಿಗಃ ॥೧೦೩॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ಉತ್ತರಾಭಾದ್ರಪದ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಥಾ*  
ಭೂರ್ಭುವಃಸ್ವಸ್ತರುಸ್ತಾರಃ ಸವಿತಾ ಪ್ರಪಿತಾಮಹಃ |  
ಯಜ್ಞೋ ಯಜ್ಞಪತಿರ್ಯಜ್ವಾ ಯಜ್ಞಾಂಗೋ ಯಜ್ಞವಾಹನಃ ॥೧೦೪॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ರೇವತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಪ್ರಥಮ ಚರಣ - ದೇ*  
ಯಜ್ಞಭೃದ್ ಯಜ್ಞಕೃದ್ ಯಜ್ಞೀ ಯಜ್ಞಭುಕ್ ಯಜ್ಞಸಾಧನಃ |  
ಯಜ್ಞಾಂತಕೃದ್ ಯಜ್ಞಗುಹ್ಯಮನ್ನಮನ್ನಾದ ಏವ ಚ ॥೧೦೫॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ರೇವತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ದ್ವಿತೀಯ ಚರಣ - ದೋ
ಆತ್ಮಯೋನಿಃ ಸ್ವಯಂಜಾತೋ ವೈಖಾನಃ ಸಾಮಗಾಯನಃ |  
ದೇವಕೀನಂದನಃ ಸ್ರಷ್ಟಾ ಕ್ಷಿತೀಶಃ ಪಾಪನಾಶನಃ ॥೧೦೬॥

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ರೇವತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ತೃತೀಯ ಚರಣ - ಚಾ
ಶಂಖಭೃನ್ನಂದಕೀ ಚಕ್ರೀ ಶಾರ್ಙ್ಗಧನ್ವಾ ಗದಾಧರಃ |  
ರಥಾಂಗಪಾಣಿರಕ್ಷೋಭ್ಯಃ ಸರ್ವಪ್ರಹರಣಾಯುಧಃ ॥೧೦೭॥  
ಶ್ರೀ ಸರ್ವಪ್ರಹರಣಾಯುಧ ಓಂ ನಮ ಇತಿ |

*ಮೀನ ರಾಶಿ, ರೇವತಿ ನಕ್ಷತ್ರ, ಚತುರ್ಥ ಚರಣ - ಚೀ
ವನಮಾಲೀ ಗದೀ ಶಾರ್ಙ್ಗೀ ಶಂಖೀ ಚಕ್ರೀ ಚ ನಂದಕೀ |  
ಶ್ರೀಮಾನ್ ನಾರಾಯಣೋ ವಿಷ್ಣುರ್ವಾಸುದೇವೋಽಭಿರಕ್ಷತು ॥೧೦೮॥  
ಶ್ರೀ ವಾಸುದೇವೋಽಭಿರಕ್ಷತು ಓಂ ನಮ ಇತಿ |

॥ ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣಾರ್ಪಣಮಸ್ತು ॥

ಇಷ್ಟಾರ್ಥ ಸಿದ್ಧಿಪ್ರದ ಮಂತ್ರಗಳು

ಉದ್ಯೋಗ ಪ್ರಾಪ್ತಿ: 
ವ್ಯವಸಾಯೋ ವ್ಯವಸ್ಥಾನಃ | ಸಂಸ್ಥಾನಃ ಸ್ಥಾನದೋ ಧ್ರುವಃ |  
ಪರದ್ಧಿಃ ಪರಮಸ್ಪಷ್ಟಃ ತುಷ್ಟಃ | ಪುಷ್ಟಃ ಶುಭೇಕ್ಷಣಃ ॥ (೪೨ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ದಾರಿದ್ರ್ಯ ನಾಶನ, ಧನ ಪ್ರಾಪ್ತಿ:  
ವಿಸ್ತಾರಃ ಸ್ಥಾವರಃ ಸ್ಥಾಣುಃ | ಪ್ರಮಾಣಂ ಬೀಜಮವ್ಯಯಮ್ |  
ಅರ್ಥೋಽನರ್ಥೋ ಮಹಾಕೋಶೋ | ಮಹಾಭೋಗೋ ಮಹಾಧನಃ ॥ (೪೬ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ಐಶ್ವರ್ಯ ಪ್ರಾಪ್ತಿ: 
ಶ್ರೀದಃ ಶ್ರೀಶಃ ಶ್ರೀನಿವಾಸಃ | ಶ್ರೀನಿಧಿಃ ಶ್ರೀವಿಭಾವನಃ |  
ಶ್ರೀಧರಃ ಶ್ರೀಕರಃ ಶ್ರೇಯಃ | ಶ್ರೀಮಾನ್ ಲೋಕತ್ರಯಾಶ್ರಯಃ ॥ (೬೫ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ವಿದ್ಯಾ ಪ್ರಾಪ್ತಿ:
ಅಮಾನೀ ಮಾನದೋ ಮಾನ್ಯೋ | ಲೋಕಸ್ವಾಮೀ ತ್ರಿಲೋಕಧೃತ್ |  ಸುಮೇಧಾ ಮೇಧಜೋ ಧನ್ಯಃ | ಸತ್ಯಮೇಧಾ ಧರಾಧರಃ ॥ (೮೦ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ಸಂತಾನ ಪ್ರಾಪ್ತಿ:  
ಅಣುರ್ಬೃಹತ್ ಕೃಶಃ ಸ್ಥೂಲೋ | ಗುಣಭೃನ್ನಿರ್ಗುಣೋ ಮಹಾನ್ |  
ಅಧೃತಃ ಸ್ವಧೃತಃ ಸ್ವಾಸ್ಯಃ | ಪ್ರಾಗ್ವಂಶೋ ವಂಶವರ್ಧನಃ ॥ (೯೦ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ಸರ್ವ ರೋಗ ನಿವಾರಣ:
ಪ್ರಮಾಣಂ ಪ್ರಾಣನಿಲಯಃ | ಪ್ರಾಣಭೃತ್ ಪ್ರಾಣಜೀವನಃ |  
ತ್ವಂ ತತ್ವವಿದೇಕಾತ್ಮಾ | ಜನ್ಮ ಮೃತ್ಯುಜರಾತಿಗಃ ॥ (೧೦೩ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ಪಾಪ ನಾಶನ: 
ಆತ್ಮ ಯೋನಿಃ ಸ್ವಯಂಜಾತೋ | ವೈಖಾನಃ ಸಾಮಗಾಯನಃ |  
ದೇವಕೀನಂದನಃ ಸ್ರಷ್ಟಾ | ಕ್ಷಿತೀಶಃ ಪಾಪನಾಶನಃ ॥ (೧೦೬ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ಸುಖ ಪ್ರಸವ:
ಶಂಖಭೃನ್ನಂದಕೀ ಚಕ್ರೀ | ಶಾರ್ಙ್ಗಧನ್ವಾ ಗದಾಧರಃ |  
ರಥಾಂಗಪಾಣಿರಕ್ಷೋಭ್ಯಃ | ಸರ್ವಪ್ರಹರಣಾಯುಧಃ ॥ (೧೦೭ನೇ ಶ್ಲೋಕ)

ಸರ್ವೇ ಜನಾಃ ಸುಖಿನೋ ಭವಂತು 

                                                                


























































































































                                                                               



























































































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